Mt 3:7-12

आज का सुसमाचार दो भागों में विभाजित है। पहले भाग में अपने पास बपतिस्मा के लिए आये फरीसियों और सदूकियों को देख कर योहन बपतिस्ता आग-बबुल होते है। योहन यर्दन नदी में बपतिस्मा दे रहा था, येरूसालेम, सारी यहूदिया और समस्त यर्दन प्रान्त के लोग उनके पास आते थे। लेकिन जब उसने फरीसियो और सदूकियो को आते देखा तब वह गुस्से में बोलने लगा, सांप के बच्चों क्यों आये ? किसने तुम्हें सचेत किया? योहन ने उन्हें ’साॅप के बच्चों’ इसलिए पुकारा कि उनका काम शैतानी था। पवित्र बाइबिल में साँप शैतान का प्रतीक है और उनका व्यवहार, विचारधारा शैतान की संतान जैसे कपटी और झूठे थे। यहुदि सोच रहे थे कि वे इब्राहिम की संतान है, चुने हुए है इसलिए बच जायेंगे। लेकिन योहन उन्हें समझाता है कि जो अच्छा फल उत्पन्न करता है वही बच पाएगा या, ईसाई होने से हम नहीं बचेंगे बल्कि हमारा फल अच्छा होना चाहिए।